Breaking News
Home / धार्मिक / धूमधाम के साथ मनाई गई देवउठनी |

धूमधाम के साथ मनाई गई देवउठनी |

ग्रामीण क्षैत्र में सोमवार को देवउठनी एकादशी पर्व अंचल में धूमधाम से मनाया गया।

पादूकलां कस्बे सहित आस पास के ग्रामीण क्षैत्र में सोमवार को   देवउठनी एकादशी पर्व अंचल में धूमधाम से मनाया गया। क्षेत्रवासी एक दिन पूर्व ही पर्व की तैयारी कर कर लिए थे। छोटी दिवाली के नाम से मनाए जाने वाले त्यौहार देवउठनी दीवाली के 10 दिन बाद मनाया जाता है। अंचल के हर घर में तुलसी विवाह मनाने की परंपरा चली आ रही है। देवउठनी पर्व पर तुलसी के पौधे को हल्दी कुमकुम अक्षत पीले वस्त्र से सजाकर गन्ने का मंडप बनाकर पूरे विधि विधान से घर की महिलाएं तुलसी विवाह की विभिन्न रस्में निभाते हुए तुलसी की पूजा अर्चना की।ग्रामीण क्षैत्र में सोमवार को देवउठनी एकादशी पर्व अंचल में धूमधाम से मनाया गया। पूजा के पश्चात लोगो ने आतिशबाजी भी की। इस पर्व में लोग उपवास रखकर रात में फलाहार का सेवन किया। इस पर्व में विशेष महत्व रखने वाला गन्ना 50 रुपए जोड़ी तक बिका। पिछले वर्ष की तुलना में गन्ने के दाम में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके अलावा कोचईए डांगकंद व शकर कंद की मांग भी रही। पर्व के चलते कांदें की पूछपरख बढ़ी रू जेठोनी पर्व के लिये आवश्यक चीजों की खरीददारी करने ग्राहक मंगलवार को दुर्गूकोंदल के साप्ताहिक बाजार पहुंचे। व्यापारी योगेश साहूए शिवेंद्र रावत ने बताया पर्व के चलते सिंघाड़ाए डांगए सेम्हर कांदा तथा गन्ना की बिक्री जमकर हुई। मांग के चलते कुछ ही देर में बाजार से सभी प्रकार के कांदे खत्म हो गए। ग्राहक ललित नरेटीए खोरिन नेताम आदि ने बताया पर्व के लिए पर्याप्त कांदा नहीं मिलने पर परेशानियां झेलनी पड़ी। दूसरे दिन भी बाजार में कांदा तथा गन्ना आदि बिकने आए।

तुलसी व सालिग्राम का हुआ विवाह

नरहरपुर। देवउठनी पर्व नगर के अलावा अंचल में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस छोटी दिवाली पर्व पर लोग सुबह से ही तैयारी के साथ साथ खरीददारी पर जुटे रहे। लोगों ने शनिवार को सुबह से पूजा में विशेष रूप प्रयोग आने वाले गन्ने की जमकर खरीदी की। पंडित श्यामलाल शर्मा ने बताया शास्त्रों अनुसार मान्यता है कि क्षीर सागर से चार मास शयन के पश्चात आज के ही दिन भगवान विष्णु अपनी निद्रा को त्यागकर जागे। यही कारण है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को हरिप्रबोधनी अथवा देवोत्थानी एकादशी कहा जाता है। लोकभाषा में इस पर्व को देवउठनी एकादशी अथवा देवठान भी कहा जाता है। आज एकादशी व्रत किया जाता है। संध्या के समय देवो को जगाया भी जाता है। इस कार्य के लिए लोगों द्वारा आंगन में खडिय़ा मिट्टी और गेरू से अल्पनाएं बनाकर आंगन के बीचो बीच पकवानए मिष्ठानए बेरए सिंघाड़े एवं गन्ना उस स्थान पर रखा गया। साथ ही एक दीपक भी जलाया गया। रात्रि में सभी वयस्क सदस्य भगवान विष्णु की पूजा की। इस पूजा के पश्चात ही आज से चातुर्मास समाप्त हो गया। अनेक लोगों ने तुलसी और सालिग्राम का विवाह धूमधाम से कराया। छोटी दिवाली के रूप में धूमधाम से उत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए महिलाएं घर.घर तुलसी स्थान को चमकाएंगी और माता तुलसी का भगवान शालीग्राम से धूमधाम के साथ विवाह करेंगी।

छोटी दीपावली जैसा माहौल दिखने लगा है। शहर के चौक.चौराहों पर गन्ने और पूजन सामग्री की दुकानें सज चुकी है। शुक्रवार को धूमधाम से तुलसी विवाह का धूमधाम से मनाया जाएगा। गोधूली वेला में घर.आंगन दीपमालाओं से दमकेंगेए द्वार.द्वार रंगोली सजेगी। छोटी दिवाली के रूप में धूमधाम से उत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए महिलाएं घर.घर तुलसी स्थान को चमकाएंगी और माता तुलसी का भगवान शालीग्राम से धूमधाम के साथ विवाह करेंगी।

चार माह से बंद शुभ मुहूर्त शुक्रवार से शुरू हो जाएंगे। शादी और मांगलिक कार्य होंगे। पौराणिक मान्यता है कि चातुर्मास काल में भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते रहे और उन्हें जपए तप और आराधना कर जगाया जाता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर प्रबोधन मंत्रोच्चार कर भगवान को नींद से जगाया जाता है।

इसलिए होता है भगवान विष्णु का तुलसी से विवाह

आज साल की सबसे बड़ी एकादशी है। ये दिन शादियों के लिए बेहद ही शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह होता है। लेकिन तुलसी का विवाह भगवान विष्णु की किसी मूर्ति के साथ नहीं बल्कि श्राप के कारण पत्थर बन चुके शालिग्राम से होता है। ये भगवान विष्णु का कोई अवतार नहीं हैए बल्कि श्राप है जिसके कारण उन्हें शालिग्राम का रूप मिला। यह श्राप इतना शक्तिशाली था जिसने भगवान विष्णु को पत्थर में बदल दिया। यह उन्हें स्वीकार करना पड़ा क्योंकि यह उनकी सबसे प्रिय भक्त वृंदा ने उन्हें दिया था।

अबूझ मुहूर्त होंगे विवाह

पंडित हस्तीमल उपाध्याय ने बताया कि देवउठनी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त होता है। इस दिन विवाह और मांगलिक कार्य के लिए सबसे शुभ दिन होता है। शादी.विवाह के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं है। लेकिन विवाह का मुहूर्त 19  नवम्‍बर  से शुरू हो रहा है। इसके बाद लगातार विवाह के मुहूर्त है।

 

Repoter – Rakesh Sharma (Padhukallan, Nagaur)

About SKY RAJASTHAN

Check Also

केंद्रीय मंत्री सी आर चौधरी ने जनसंपर्क कर भाजपा प्रत्याशी को अधिक मतों से जिताने की अपील की

केंद्रीय मंत्री सी आर चौधरी ने जनसंपर्क कर भाजपा प्रत्याशी को अधिक मतों से जिताने की अपील की

केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में प्रचार प्रसार किया | पादूकलां नागौर राजस्थान  पादू …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *